मे हालही मे वीरमगाम और धोलका का दौराकिया. जहा मेने जाना के काफी मात्र मे बच्चे जो पड़ना चाहते है. मगर अपने घर की आर्थिक परिस्थिति के वजासे नहीं पड़ पाते. और चली आरही अपनी परम्परा यानि ज़मिन्दारो के वहा मामूलिसे वेतन पर गुज़ारा करना ही अपना नसीब समजते है.
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